लाखों छात्रों का दावा — पेपर अच्छा गया, फिर नंबर इतने कम क्यों? धुंधली कॉपियां, गायब सप्लीमेंट्री, गलत उत्तर पुस्तिकाओं के आरोप और डिजिटल मूल्यांकन पर बढ़ता विवाद! आखिर बिना तैयारी के OSM लागू करने की इतनी जल्दी क्यों थी? किसने लिया ये फैसला? क्या शिक्षा मंत्रालय जवाब देगा? जब बच्चों के भविष्य का सवाल हो, तो तकनीकी लापरवाही की कीमत कौन चुकाएगा? देश जानना चाहता है — जवाबदेही किसकी है?
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CBSE में नंबरों का संकट: छात्रों की नाराज़गी, टीचर्स की परेशानी और छात्रों के कम नंबर, धुंधली कॉपियां और उठते बड़े सिस्टम पर सवाल !
देश का सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा बोर्ड माने जाने वाला CBSE (Central Board of Secondary Education) इस समय गंभीर विवादों के केंद्र में है। लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षक बोर्ड की नई मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। साल 2026 में लगभग 17.68 लाख छात्रों ने CBSE कक्षा 12वीं की परीक्षा दी। वर्षों से बोर्ड में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पारंपरिक स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग सिस्टम के तहत होती रही है, लेकिन इस बार बोर्ड ने अचानक On-Screen Marking (OSM) प्रणाली लागू कर दी।
क्या है OSM सिस्टम? OSM यानी On-Screen Marking, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाता है और शिक्षक स्क्रीन पर देखकर मूल्यांकन करते हैं। बताया जा रहा है कि फरवरी 2026 में यह फैसला लिया गया और बहुत कम समय में लागू भी कर दिया गया। लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद कई छात्रों ने कम अंकों को लेकर आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
छात्रों और शिक्षकों की शिकायतें
कई छात्रों का दावा है कि परीक्षा अच्छी होने के बावजूद अपेक्षा से काफी कम अंक मिले।
कुछ छात्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाएं मांगने पर कथित तौर पर कई विसंगतियां सामने आईं —
- हैंडराइटिंग मेल नहीं खाने के आरोप
- सप्लीमेंट्री कॉपियां गायब होने की शिकायत
- अधूरी उत्तर पुस्तिकाओं के आरोप
- धुंधली और अस्पष्ट डिजिटल कॉपियों की समस्या
कुछ शिक्षकों ने भी कहा कि उन्हें जो डिजिटल कॉपियां मूल्यांकन के लिए मिलीं, उनमें लिखावट स्पष्ट नहीं थी। इससे स्टेप-मार्किंग प्रभावित होने की संभावना बनी।

स्कैनिंग नहीं, फोटो अपलोड होने के आरोप
इस मामले में यह दावा भी सामने आया कि कई उत्तर पुस्तिकाएं ठीक से स्कैन नहीं की गईं बल्कि उनकी तस्वीरें लेकर अपलोड की गईं। इसी वजह से लिखावट साफ दिखाई नहीं दी और मूल्यांकन प्रभावित हुआ।
OSM टेंडर और कंपनी पर सवाल
OSM प्रक्रिया का टेंडर Coempt EduTech नामक कंपनी को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कंपनी को पहले Globarena Technologies के नाम से जाना जाता था। इस कंपनी का नाम पहले भी 2019 तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद में सामने आ चुका है, जहां बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। इसी संदर्भ में कुछ छात्रों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने आरोप लगाए हैं कि CBSE के टेंडर नियमों में बदलाव कर कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होगी।
उठते बड़े सवाल
इस पूरे विवाद के बीच कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं —
- क्या बिना पर्याप्त तैयारी के OSM लागू करना सही फैसला था?
- क्या शिक्षकों और सिस्टम को पहले पर्याप्त ट्रेनिंग दी गई थी?
- यदि तकनीकी खामियां थीं, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
- क्या शिक्षा मंत्रालय और CBSE इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण देंगे?
- क्या प्रभावित छात्रों की कॉपियों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए?
शिक्षा व्यवस्था और भरोसे की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां और प्रशासनिक सवाल लगातार उठते रहे हैं। ऐसे में CBSE जैसे बड़े बोर्ड में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। लाखों छात्रों का भविष्य परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए जरूरी है कि हर शिकायत की निष्पक्ष जांच हो, तकनीकी कमियों को स्वीकार कर सुधार किया जाए और छात्रों का भरोसा बहाल किया जाए।

निष्कर्ष: CBSE OSM विवाद ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं!
अगर लाखों छात्रों को अपने रिजल्ट पर भरोसा नहीं, टीचर्स को मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा नहीं और बोर्ड जवाब देने से बच रहा है, तो सवाल सिर्फ़ नंबरों का नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। OSM लागू करने की जल्दबाज़ी किसके कहने पर हुई? तकनीकी खामियों, धुंधली कॉपियों और विवादित टेंडर पर जवाब कौन देगा? जब देश के बच्चों का भविष्य दांव पर हो, तब प्रयोग नहीं, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए। शिक्षा व्यवस्था राजनीतिक भाषणों से नहीं, मजबूत सिस्टम और ईमानदार जवाबदेही से चलती है।
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Writer – Sita Sahay










