“किसी नेता का मूल्यांकन” नारों से या चाटुकार मीडिया के महिमा मंडन से, या सोशल मीडिया पब्लिसिटी से या पीआर एजेंसी से नहीं, उसके कार्यकाल की विरासत (उस दौर के निर्णयों, नीतियों, उपलब्धियों औ...
क्या भारत में जवाबदेही केवल आम जनता के लिए है और सत्ता के लिए नहीं? नोटबंदी की कतारों से लेकर पुलवामा की शहादत, किसान आंदोलन की मौतों से लेकर गिरते रुपये, लगातार रेल हादसों और पेपर लीक कांडों तक—हर सं...
देश की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। चुनाव नजदीक आते ही विकास, रोजगार और महंगाई के वादों की बौछार शुरू हो गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता के असली मुद्दों का समाधान भी उतनी ही तेजी स...








