दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। आज राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्मॉग और जहरीली धुंध के कारण दृश्यता भी प्रभावित हुई है। बढ़ते वाहन उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और पराली जलाने जैसी वजहों से प्रदूषण और बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर भीषण वायु प्रदूषण की चपेट में है। ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा गई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, आज 5:30 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहना बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
दिल्ली में बढ़ते AQI का सीधा असर दृश्यता पर भी पड़ा है। कई इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम दर्ज की गई, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। सुबह और शाम के समय स्कूल जाने वाले बच्चों, ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। डॉक्टर लगातार लोगों को मास्क पहनने, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और घर के अंदर रहने की सलाह दे रहे हैं। इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे यह साफ हो गया है कि दिल्ली की हवा फिलहाल सांस लेने लायक नहीं रह गई है।

Delhi Pollution Causes: दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते कारण और बिगड़ती स्थिति
दिल्ली में प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं प्रमुख हैं। सर्दियों में हवा की गति धीमी हो जाती है और तापमान गिरने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस जाते हैं, जिससे स्मॉग की स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा, दिवाली के बाद पटाखों से निकलने वाले जहरीले कण भी हवा की गुणवत्ता को और बिगाड़ देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लाखों की संख्या में चलने वाले पेट्रोल और डीज़ल वाहनों से निकलने वाला धुआं AQI को खतरनाक स्तर तक पहुंचा देता है। निर्माण और तोड़-फोड़ गतिविधियों के दौरान धूल नियंत्रण के नियमों का पालन न होना भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। कई बार ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई देता है।
पराली जलाने का मुद्दा हर साल दिल्ली की हवा को जहरीला बना देता है। हालांकि सरकारें किसानों को इसके विकल्प देने का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि बड़ी संख्या में किसान अब भी खेतों में फसल अवशेष जलाने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर की हवा पर पड़ता है और AQI ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है।

Health Impact & Solutions: स्वास्थ्य पर असर और प्रदूषण से निपटने के उपाय
दिल्ली के खराब AQI का सबसे गंभीर असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस संबंधी बीमारियों, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों की समस्या और हृदय रोग के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण वे इस जहरीली हवा से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक ‘गंभीर’ श्रेणी की हवा में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है और जीवन प्रत्याशा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार को दीर्घकालिक और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करना, निर्माण स्थलों पर सख्त नियम लागू करना और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी जरूरी है। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बनाकर पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा। आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे निजी वाहनों का कम उपयोग करें, कार-पूलिंग अपनाएं और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनें।
दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 10 महत्वपूर्ण उपाय :-
- सार्वजनिक परिवहन को सस्ता, सुलभ और मजबूत बनाना
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना
- पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त प्रतिबंध
- निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण नियमों का कड़ाई से पालन
- औद्योगिक उत्सर्जन पर रियल-टाइम निगरानी और जुर्माना
- पराली जलाने का स्थायी समाधान और किसानों को तकनीकी सहायता
- बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और ग्रीन बेल्ट का विस्तार
- कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त कार्रवाई
- स्कूल, ऑफिस के लिए प्रदूषण आपातकालीन वर्क-फ्रॉम-होम नीति
- आम नागरिकों में पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी
दिल्ली-एनसीआर में इस समय मौसम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिसंबर के आखिरी दिनों में ठंड का प्रकोप तेज होता जा रहा है, वहीं घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और कई इलाकों में AQI रेड जोन में दर्ज किया जा रहा है। बदलते मौसम और खराब हवा का सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों की सेहत पर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में Delhi NCR Weather, ठंड, कोहरा और Air Pollution की स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए सतर्कता और सावधानी बेहद जरूरी है।
जब तक सामूहिक प्रयास नहीं किए जाएंगे, तब तक दिल्ली की हवा यूं ही जहरीली बनी रहेगी। जरूरत इस बात की है कि सरकार, प्रशासन और जनता मिलकर प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को साफ हवा और स्वस्थ जीवन मिल सके।
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Writer – Sita Sahay











